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गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के पà¥à¤°à¤•ार, तरीके व पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की समापà¥à¤¤à¤¿ के लिठगरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤
In this Article
गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ कà¥à¤¯à¤¾ है?
गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के पà¥à¤°à¤•ार
पहली तिमाही में किठजाने वाले गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के तरीके
दूसरी तिमाही में किठजाने वाले गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के तरीके
तीसरी तिमाही में किठजाने वाले गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के तरीके
गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक तरीके
à¤à¤• गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला अपनी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान अनेक समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का सामना करने में सकà¥à¤·à¤® होती है किंतॠगरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ के बाद किसी à¤à¥€ कारण से यदि गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ हो जाठतो यह समसà¥à¤¯à¤¾ उसके लिठअतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• असहनीय हो जाती है। हालांकि पति-पतà¥à¤¨à¥€ दोनों के लिठगरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ का निरà¥à¤£à¤¯ ले पाना बहà¥à¤¤ मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है।गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ अनेक कारणों से हो सकता है और इसे करने के कई तरीके व दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ हो सकते हैं। गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के बारे में अधिक जानकारी के लिठइस लेख को पूरा पà¥à¥‡à¤‚।
गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ कà¥à¤¯à¤¾ है?
गरà¥à¤ में पल रहे à¤à¥à¤°à¥‚ण या गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को खतà¥à¤® करने को | गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ | कहते हैं और यह कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤• माठके लिठमानसिक व शारीरिक रूप से अधिक पीड़ादायक होती है। गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ करने के लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° दवाओं व सरà¥à¤œà¤°à¥€ का उपयोग करते हैं। गरà¥à¤ में पल रहे शिशॠकी अनायास या पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से मृतà¥à¤¯à¥ हो जाने पर à¤à¥€ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो सकता है जिसे आम à¤à¤¾à¤·à¤¾ में | मिसकैरेज | कहते हैं।
गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के बाद महिलाओं को इसके दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ का à¤à¥€ सामना करना पड़ सकता है, जिसमें शामिल हैं अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤°à¤¾à¤µ, शà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¿ में à¤à¤‚ठन या दरà¥à¤¦ महसूस होना, जी मिचलाना और उलà¥à¤Ÿà¥€ होना। गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के बाद यदि आप इन लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ का सामना करती हैं तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से संपरà¥à¤• करें।
गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के पà¥à¤°à¤•ार
महिलाओं की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखते हà¥à¤ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ चरण पर निरà¥à¤à¤° करती है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के शà¥à¤°à¥‚आती दिनों में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ सरल होता है और इसे दवाओं के सेवन से à¤à¥€ किया जा सकता है। किंतॠयदि किसी महिला की गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤§à¤¿ अधिक हो चà¥à¤•ी है तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° सरà¥à¤œà¤°à¥€ करवाने की सलाह देते हैं। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के चरण के आधार पर गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित समय के दौरान किया जा सकता है;
पहली तिमाही अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ 1-3 महीनों में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ करवाया जा सकता है जो सरल होता है और इसे दवाओं के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¥€ किया जा सकता है।
दूसरी तिमाही के अंतराल में 4-6 महीनों के बीच गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ करवाया जा सकता है।
गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ तीसरी तिमाही में 7-9 महीनों के बीच सरà¥à¤œà¤°à¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ करवाने की सलाह दी जाती है।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤§à¤¿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ करवाने के अलग-अलग तरीके होते हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤: चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ कराने के लिठकà¥à¤› दवाओं व इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ या रसायन का उपयोग किया जाता है। मिफेपà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ (Mifepristone) और मिसोपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤² (Misoprostol) दो सामानà¥à¤¯ रूप से उपयोग किठजाने वाले ततà¥à¤µ हैं जो RU- 486, गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की गोली/पिल या मिफेपà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤¸ (Mifeprex) के रूप में उपलबà¥à¤§ हैं।गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के लिठइन तरीकों का उपयोग आमतौर पर गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पहली तिमाही की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ से लेकर मधà¥à¤¯ तक किया जाता है।
सरà¥à¤œà¤°à¥€ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤: इनवेसिव या सरà¥à¤œà¤°à¥€ के कà¥à¤› तरीके हैं जैसे मैनà¥à¤…ल वैकà¥à¤¯à¥‚म à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤¶à¤¨, डायलेटेशन व कà¥à¤¯à¥‚रेटेज। दूसरी तिमाही में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ या चिकितà¥à¤¸à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठगठअसफल गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के लिठडायलेटेशन या इवैकà¥à¤¯à¥à¤à¤¶à¤¨ का उपयोग किया जा सकता है।
पहली तिमाही में किठजाने वाले गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के तरीके
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखते हà¥à¤ पहली तिमाही में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ करवाना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ माना जाता है। इस दौरान गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ दवाओं/चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ या सरà¥à¤œà¤°à¥€, दोनों तरीकों के माधà¥à¤¯à¤® से किया जा सकता है। हालांकि, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के शà¥à¤°à¥‚आती माह से लेकर अंतिम माह तक गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हमेशा चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ ही होना चाहिà¤à¥¤
चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ करने के दो सबसे अधिक उपयोग किठजाने वाले तरीके निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैं:
1. मिथोटà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤¸à¥‡à¤Ÿ (à¤à¤®.टी.à¤à¤•à¥à¤¸.) और मिसोपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤² :
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के पहले 7 हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के इस तरीके का अधिक उपयोग किया जाता है। मिथोटà¥à¤°à¥‡à¤•à¥à¤¸à¥‡à¤Ÿ की पिल या लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡, डीहाइडà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‹à¤²à¥‡à¤Ÿ रेडकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¸ के à¤à¤‚जाइम को अवरà¥à¤¦à¥à¤§ करती है और डी.à¤à¤¨.à¤. सिंथेसिस के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ थाइमिडीन के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ को रोकती है। यह गरà¥à¤ में पल रहे à¤à¥à¤°à¥‚ण के लिठविषाकà¥à¤¤ होती है, इसकी लगà¤à¤— 75 मि.गà¥à¤°à¤¾. की मातà¥à¤°à¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को खतà¥à¤® करने में सकà¥à¤·à¤® है। मिसोपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤² à¤à¤• पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤—à¥à¤²à¥ˆà¤‚डीन होता है जो गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के लिठà¤à¤• यूटेरोटॉनिक की तरह कारà¥à¤¯ करता है और गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ के संकà¥à¤šà¤¨ को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करके à¤à¥à¤°à¥‚ण को बाहर निकालता है।
2. मिफेपà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ और मिसोपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤²:
मिफेपà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤¨ नामक पहली पिल, गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को सकà¥à¤°à¥€à¤¯ करने वाले आवशà¥à¤¯à¤• हॉरà¥à¤®à¥‹à¤¨ को अवरà¥à¤¦à¥à¤§ करती है। मिसोपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤² नामक दूसरी पिल गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ की à¤à¤‚ठन को बà¥à¤¾à¤¤à¥€ है जिससे रकà¥à¤¤-सà¥à¤°à¤¾à¤µ होता है और इस पà¥à¤°à¤•ार से गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो जाता है (यह मिसकैरेज के समान होता है)।
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की पहली तिमाही के अंत में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ या चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ तरीकों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ असफल गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ में सरà¥à¤œà¤°à¥€ के निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित तरीकों का उपयोग किया जा सकता है:
मैनà¥à¤…ल à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤¶à¤¨
à¤à¤®.वी.à¤. या मैनà¥à¤…ल वैकà¥à¤¯à¥‚म à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ सरà¥à¤œà¤°à¥€ का सबसे कम पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ तरीका है जिसका उपयोग गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤°à¤£ के दूसरे से तीसरे महीने में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के लिठकिया जाता है। सरà¥à¤œà¤°à¥€ की इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में दरà¥à¤¦ न हो इसलिठमहिला को à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥€à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ देकर गरà¥à¤ में पल रहे à¤à¥à¤°à¥‚ण को सकà¥à¤¶à¤¨ टà¥à¤¯à¥‚ब के जरिठगरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ से बाहर खींचा जाता है।
डायलेटेशन व कà¥à¤¯à¥‚रेटेज (डी. à¤à¤‚ड. सी.)
डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤Ÿà¥€à¤² के चमà¥à¤®à¤š जैसे आकार के यंतà¥à¤° की मदद से गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² को अलग करके हटाते हà¥à¤ à¤à¥à¤°à¥‚ण को गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ से बाहर निकाला जाता है। इस तरीके का उपयोग 3 महीने की गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के रूप में किया जा सकता है और इसमें à¤à¤®.वी.à¤. की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में अधिक रकà¥à¤¤ की हानि होती है।
दूसरी तिमाही में किठजाने वाले गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के तरीके
1. सरà¥à¤œà¤°à¥€: डायलेशन व इवैकà¥à¤¯à¥à¤à¤¶à¤¨ (डी. à¤à¤‚ड ई.)
डी. à¤à¤‚ड ई. पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ डायलेशन व कà¥à¤¯à¥‚रेटेज (डी. à¤à¤‚ड सी.) के समान होती है और आमतौर पर गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के लिठइसका उपयोग गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की दूसरी तिमाही में 24वें सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक किया जा सकता है। इन दोनों पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं में अंतर यह है कि डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ यंतà¥à¤° की मदद से à¤à¥à¤°à¥‚ण को निकालने के बजाय, डॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤• चिमटी के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¥à¤°à¥‚ण को गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ से बाहर निकालते हैं और अंत में बचे हà¥à¤ गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के अनà¥à¤¯ टिशू को हटाने के लिठवैकà¥à¤¯à¥‚म à¤à¤¸à¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का उपयोग किया जाता है। गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की दूसरी तिमाही में à¤à¥à¤°à¥‚ण के सिर का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ होने के कारण गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ को अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• हानि होती है और नाड़ी से अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• रकà¥à¤¤-सà¥à¤°à¤¾à¤µ à¤à¥€ होता है।
2. इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤²à¥‡à¤¶à¤¨
हालांकि यह सामानà¥à¤¯ से बहà¥à¤¤ कम होता है लेकिन दूसरी तिमाही के अंतिम चरण (गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 5वें या 6वें महीने में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾) से लेकर तीसरी तिमाही तक रासायनिक गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के तरीकों का उपयोग किया जाता है जिसमें इंजेकà¥à¤¶à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कà¥à¤› दवाओं या रसायनों को पेट में या गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• थैली में डाला जाता है जिस कारण से à¤à¥à¤°à¥‚ण की मृतà¥à¤¯à¥ के बाद वह गरà¥à¤ से बाहर निकल जाता है।
3. सोडियम पोइज़निंग (4 महीने से अधिक)
“सलाइन à¤à¤®à¥à¤¨à¥€à¤“सेनà¥à¤Ÿà¥€à¤¸à¤¿à¤¸â€ या “हाइपरटॉनिक सलाइन†गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के तरीके के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है, आमतौर पर इसका उपयोग गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के 16 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के बाद किया जाता है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में à¤à¤®à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¤¿à¤• दà¥à¤°à¤µ को सोडियम सॉलà¥à¤¯à¥‚शन से बदल दिया जाता है और यह हाइपरटॉनिक सलाइन बचà¥à¤šà¥‡ के लिठविषाकà¥à¤¤ होता है।
4. यूरिया (5-8 महीने)
ऑकà¥à¤¸à¥€à¤Ÿà¥‰à¤¸à¤¿à¤¨ या पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤—à¥à¤²à¥ˆà¤‚डिन-यà¥à¤•à¥à¤¤ यूरिया के उपयोग से à¤à¥€ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ किया जा सकता है। हाइपरटॉनिक सलाइन से अधिक खतरा हो सकता है इसलिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤—à¥à¤²à¥ˆà¤‚डिन-यà¥à¤•à¥à¤¤ यूरिया के इंजेकà¥à¤¶à¤¨ की सलाह देते हैं।
5. पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤—à¥à¤²à¥ˆà¤‚डिंस (4-9 महीने)
पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤—à¥à¤²à¥ˆà¤‚डिंस पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से होते हैं या यह शरीर में आंतरिक रूप से मौजूद पदारà¥à¤¥ होते हैं जो सामानà¥à¤¯à¤¤à¤ƒ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• हैं। अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पैरेनà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤² पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤Ÿà¤¾à¤—à¥à¤²à¥ˆà¤‚डिनà¥à¤¸ को इंजेकà¥à¤Ÿ करने से तीवà¥à¤° पà¥à¤°à¤¸à¤µ-पीड़ा शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है, जिसके परिणाम-सà¥à¤µà¤°à¥‚प गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ सहजता से होता है। इस तरीके का उपयोग आमतौर पर दूसरी तिमाही (5वें या 6वें महीने की गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾) के दौरान किया जाता है।
तीसरी तिमाही में किठजाने वाले गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के तरीके
गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ की तीसरी तिमाही में à¤à¥à¤°à¥‚ण का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ शारीरिक विकास होता है। यदि गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान संरचनातà¥à¤®à¤• विसंगतियां या आनà¥à¤µà¤‚शिक (जेनेटिक) रोगों की समय रहते जांच नहीं हो पाई है, तो यह तीसरी-तिमाही में गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ का संकेत हो सकता है, इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में केवल सरà¥à¤œà¤°à¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ किया जा सकता है ।
आंशिक-गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ (5-8 महीनों के बीच गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤)
इस तकनीक का उपयोग गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के लिठउन महिलाओं में किया जाता है जिनकी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤§à¤¿ 5-8 महीने की हो जाती है। डॉकà¥à¤Ÿà¤° दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सोनोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ और चिमटी की मदद से बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर और अनà¥à¤¯ उपकरणों से शिशॠके सिर को गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ से बाहर निकाला जाता है।
हिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‰à¤®à¥€ (6-9 महीनों के बीच गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤)
डॉकà¥à¤Ÿà¤° सरà¥à¤œà¤°à¥€ या ऑपरेशन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ में चीरा लगाकर à¤à¥à¤°à¥‚ण और गरà¥à¤à¤¨à¤¾à¤² को बाहर निकालते हैं। यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ सी-सेकà¥à¤¶à¤¨ (सिजेरियन) के समान होती है किनà¥à¤¤à¥ इस तरीके का उपयोग तब किया जाता है जब गरà¥à¤ में ही à¤à¥à¤°à¥‚ण की मृतà¥à¤¯à¥ हो चà¥à¤•ी हो।
गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक तरीके
जब à¤à¤• गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला बिना चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ सलाह के दवाओं या गैर-औषधीय पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का उपयोग करके अपनी गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को समापà¥à¤¤ करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ करती है, तो इसे | सà¥à¤µ-गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ | कहा जाता है। सà¥à¤µ-गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के लिठचिकितà¥à¤¸à¤• से सलाह लेने व आपके लिठइसके कौन से तरीके सही हैं, यह जानकारी लेने को | इन-कà¥à¤²à¤¿à¤¨à¤¿à¤• | गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ कहते हैं। शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ महीनों में सà¥à¤µ-गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के तरीके आसान और अधिक सफल रहे हैं। किनà¥à¤¤à¥ खयाल रहे यह तरीके आपके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठखतरा हो सकते हैं और इसका असफल पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ à¤à¥à¤°à¥‚ण व आपके सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ को गंà¤à¥€à¤° व सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ नà¥à¤•सान à¤à¥€ पहà¥à¤à¤šà¤¾ सकता है।
सà¥à¤µ-गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ के लिठआमतौर पर पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ तरीके निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित हैं:
अतिरिकà¥à¤¤ शारीरिक परिशà¥à¤°à¤®: à¤à¤¾à¤°à¥€ वजन उठाने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है जिससे गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ होती है।
गरà¥à¤à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤• खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ और उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का सोवन: कà¥à¤› खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ और उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦, जैसे मटन मजà¥à¤œà¤¾, सूखी मेंहदी का पाउडर गाजर के बीज का सूप गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ का कारण बन सकते हैं और इसके अलावा विटामिन | सी | , पपीता और इतà¥à¤¯à¤¦à¤¿ से à¤à¥€ सहज गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बॠजाती है।
पेट पर आघात: पेट पर अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• मालिश करने से और पेट के आस-पास अनà¥à¤¯ शारीरिक आघात के परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो सकता है।
पेट के बल गिरना: गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला का पेट के बल गिरने से à¤à¥€ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बॠसकती है।
नà¥à¤•ीले उपकरण: सà¥à¤ˆ, हà¥à¤•, सेफà¥à¤Ÿà¥€ पिन आदि जैसे नà¥à¤•ीला उपकरण चà¥à¤à¤¨à¥‡ से à¤à¥€ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो सकता है।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤°à¥€à¤µà¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ गà¥à¤¹à¤¾ में वैकà¥à¤¯à¥‚म उपकरण डालने से à¤à¥€ गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बॠसकती है।
हानिकारक रसायन का उपयोग: कà¥à¤› पदारà¥à¤¥ जैसे तारपीन का तेल, कà¥à¤› योनिक पेसरीज़ जननांग पथ और इसके आस-पास के अणà¥-जीवों के लिठहानिकारक और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ होते हैं। इनके संपरà¥à¤• से à¤à¥€ सहज गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ हो सकता है।
à¤à¤• माठके लिठगरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है और उसके जीवन पर इसका अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ सकता है। गरà¥à¤à¤ªà¤¾à¤¤ करने के मानà¥à¤¯ कारण होना चाहिठऔर साथ ही इसे सही समय पर व सही तरीके से पूरी चिकितà¥à¤¸à¥€à¤¯ परीकà¥à¤·à¤£ के साथ करना अनिवारà¥à¤¯ है।
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